उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा आबादी और लोकसभा सीटों वाला राज्य है. 543 सदस्यीय लोकसभा में अकेले उत्तर प्रदेश 80 सांसद भेजता है. बीते दो लोकसभा में बीजेपी ने राज्य में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. 2019 में तो सपा बसपा के महागठबंधन को भी बीजेपी ने बुरी तरह परास्त कर दिया था. अब पार्टी की तैयारी इस बार भी लोकसभा चुनाव में बेहतर शानदार प्रदर्शन की है. इसी क्रम में बुधवार को बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक लखनऊ में हुई. इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह मौजूद रहे.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने के सवाल पर कहा कि हम सभी लोग उस परंपरा को मानते हैं कि जब भगवान बुलाते हैं तभी दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि घर से भगवान के दर्शन करके निकलते हैं। सीढ़ी उतरते ही भगवान के दर्शन होते हैं। दरवाजा खोलते ही भगवान के दर्शन होते हैं। अब आप ही बताइए कि किस भगवान के दर्शन करने जाऊं।
भाजपा को यूपी की सभी 80 सीटों पर हराने का काम करेंगे
सपा प्रमुख ने कहा कि लोकसभा चुनाव की
लगातार तैयारी हो रही है। गठबंधन बनने के बाद यूपी की 80 सीटें हराने का
काम करेंगे और भाजपा को हटाएंगे। उन्होंने कहा कि संविधान और नारी सम्मान दोनों
बचाएंगे। महिलाओं को लेकर बोले कि लोकसभा चुनाव में समाजवादी महिला संगठन पूरी
ईमानदारी के साथ सपा को जिताने का काम करेगा। सपा ने हमेशा पिछड़े, दलित,
अल्पसंख्यक
और महिलाओं की बात उठाई है। सबसे ज्यादा गैर बराबरी का सामना महिलाओं को करना
पड़ता है। आरोप लगाया कि यूपी में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। महिलाओं को
मणिपुर याद है। सभी ने इस कांड की निंदा की लेकिन भाजपा ने नहीं की।
महिला सुरक्षा पर सपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर 1090 हेल्पलाइन शुरू की। सभी राज्यों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने तारीफ की। न्यूट्रीशन मिशन में गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार मिलता था। समाजवादी पेंशन 500 रुपये दे रही थी। हमारी सरकार बनती तो गरीब महिलाओं को 3000 रुपये देती।
2024 लोकसभा चुनाव
की तारीखों के ऐलान से पहले बीजेपी ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। लोकसभा
चुनाव के लिए बीजेपी ने 24 सूत्री एजेंडा बनाया है। इस एजेंडे के
जरिए बीजेपी लोकसभा चुनाव में जीत की तैयारी कर रही है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों
को लेकर बुलाई गई दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक के बाद बीजेपी ने अपनी राज्य
इकाइयों को बड़ा टास्क दिया है। सभी राज्य इकाइयों को एजेंडे पर सख्ती से काम करने
को कहा गया है। इन सभी करों की समय-समय पर समीक्षा भी की जायेगी. इसमें बीजेपी के
सभी मोर्चों को मिलकर काम करना होगा और राज्य इकाई को भी सहयोग करने का निर्देश
दिया गया है।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए बने विपक्षी गठबंधन INDIA सीट शेयरिंग को लेकर मंथन करने में जुटा है. कांग्रेस सीट बंटवारे को लेकर लचीला रुख अपनाने का संकेत दे चुकी है. जयराम रमेश ने कहा था कि कांग्रेस खुले मन और बंद मुंह से सीट शेयरिंग पर बात करेगी. INDIA गठबंधन में एक बात साफ है कि जिस राज्य में जो भी क्षत्रप मजबूत है, उनकी अगुवाई में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय होगा. ऐसे में सभी की निगाहें यूपी और बिहार में INDIA गठबंधन की सीट बंटवारे पर हैं और सवाल यह उठता है कि क्षेत्रीय दल क्या कांग्रेस को सीट देने में बड़ा दिल दिखा पाएंगे?
उत्तर प्रदेश में INDIA गठबंधन का हिस्सा सपा, कांग्रेस और आरएलडी है. सूबे में विपक्षी गठबंधन को लीड करने का जिम्मा अखिलेश यादव के कंधों पर है. कांग्रेस साढ़े तीन दशक से यूपी की सत्ता से बाहर है और उसका पूरा दारोमदार सपा और आरएलडी पर है. इस तरह सीट शेयरिंग का फॉर्मूले में कांग्रेस छोटे भाई की भूमिका में रहेगी. सूत्रों की मानें तो यूपी में कांग्रेस कम से कम 22 से 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है और आरएलडी भी 10 से 12 सीटें मांग रही है. सपा न ही कांग्रेस के मुताबिक सीटें देने के मूड में है और न ही आरएलडी की डिमांड के लिहाज से. सपा की रणनीति है कि कांग्रेस को 12 से 15 सीटें और आरएलडी के 6 से 7 सीटें ही छोड़ने के लिए तैयार है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि सीट के बंटवारे को लेकर पूर्व के चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन सबसे बड़ा आधार होगा और ऐसे में गठबंधन में कांग्रेस को 10 से 15 सीटों के बीच ही संतोष करना पड़ सकता है. कांग्रेस 2009 में जीती हुई लोकसभा सीटों पर अपनी दावेदारी कर रही है, जिसमें रायबरेली अमेठी, कानपुर, प्रतापगढ़, बाराबंकी, उन्नाव, सहारनपुर, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, बरेली, झांसी जैसी सीटें है. कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ रायबरेली ही जीत सकी थी. अमेठी, फतेहपुर सीकरी और कानपुर ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जहां पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी. सहारनपुर, बाराबंकी, लखनऊ, उन्नाव और वाराणसी उन लोकसभा सीटों में शामिल है, जहां पर पार्टी को डेढ़ लाख से ज्यादा वोट मिले थे. ऐसे में ये आसानी से कहा जा सकता है कि पूरे प्रदेश में 8 से 10 ऐसी सीटें हैं, जहां पर कांग्रेस गठबंधन में सकारात्मक भूमिका निभा सकती है.
क्या थे मायावती के इस बयान के मायने?
आपको बता दें कि मायावती ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘भविष्य में देश में जनहित में कब किस को किसी की भी जरुरत पड़ जाए, यह कुछ भी कहा नहीं जा सकता है’. बसपा चीफ के इस बयान को लेकर सियासी मामलों के जानकारों का मानना है कि मायावती लोकसभा चुनाव के बाद भी किसी भी गठबंधन का हिस्सा बन सकती हैं. वहीं, कुछ सियासी जानकारों का यह अनुमान है कि बसपा चीफ ने अपने इस बयान से इंडिया गठबंधन की तरफ नरम रुख अपनाया है.




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