नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाओं के शुल्क में बदलाव किया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी नए नियमों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने, रिन्यू कराने और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए संशोधित शुल्क लागू होंगे। नई व्यवस्था के तहत कुछ सेवाओं की फीस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है, जिससे पासपोर्ट बनवाना पहले की तुलना में महंगा हो सकता है।
सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए बताया है कि पासपोर्ट नियम, 1980 की पुरानी शुल्क सूची को हटाकर नई शुल्क संरचना लागू की जाएगी। इसके बाद देशभर के सभी पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर नई दरें प्रभावी हो जाएंगी।
क्या बदलेगा?
नया पासपोर्ट बनवाने के लिए अधिक शुल्क देना पड़ सकता है।
पासपोर्ट रिन्यूअल की फीस में भी संशोधन किया गया है।
कुछ विशेष सेवाओं पर शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
नए शुल्क 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होंगे।
विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट बयान पर सियासी घमासान शुरू।
— Mitesh (@Miteshsing) June 25, 2026
मंत्रालय ने कहा- पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं। बयान के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरा, कई सवाल उठाए। पासपोर्ट की कानूनी मान्यता को लेकर देशभर में बहस तेज।#pasport #bjp pic.twitter.com/r2TMiK15uR
क्यों बढ़ाई गई फीस?
सरकार का कहना है कि पासपोर्ट सेवाओं के आधुनिकीकरण, दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत बनाने और सेवा वितरण में सुधार के लिए शुल्क संरचना को अपडेट किया गया है।
पासपोर्ट को लेकर चल रही है बहस
हाल के दिनों में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। इसी बीच पासपोर्ट सेवाओं और नियमों में किए गए बदलावों ने नई चर्चा को जन्म दिया है।



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