खीरे की खेती पर 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी को लेकर घिरे केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, गहलोत ने उठाए हितों के टकराव के सवाल

 

खीरे की खेती पर 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी को लेकर घिरे केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, गहलोत ने उठाए हितों के टकराव के सवाल

नई दिल्ली/जयपुर: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी खीरे की खेती के लिए मिली करीब 99 लाख 60 हजार रुपये की सब्सिडी को लेकर विवादों में घिर गए हैं। आरोप है कि यह सब्सिडी उन्हें उनके ही मंत्रालय से जुड़ी एक योजना के तहत मिली, जबकि वह उस योजना को मंजूरी देने वाले बोर्ड के पदेन (एक्स-ऑफिशियो) उपाध्यक्ष भी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अजमेर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद और केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने पॉलीहाउस परियोजना के लिए यह सब्सिडी प्राप्त की। इस मामले को लेकर विपक्ष ने ‘हितों के टकराव’ का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

अशोक गहलोत ने लगाए गंभीर आरोप

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री से जुड़ा यह मामला गंभीर है और इसमें हितों के टकराव की स्थिति दिखाई देती है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के नए तरीके सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मंत्री ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह खुद किसान हैं और आधुनिक तकनीक के जरिए खेती करते हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस परियोजना से जुड़ी कोई जानकारी छिपाई नहीं है।
मंत्री के अनुसार, पॉलीहाउस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने करीब आठ साल पहले यानी 2018 में आवेदन किया था। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है।

पॉलीहाउस में खीरे की खेती पर विवाद

बताया जा रहा है कि यह मामला पॉलीहाउस तकनीक से खीरे की खेती से जुड़ा है। इस तकनीक के जरिए नियंत्रित वातावरण में खेती की जाती है, जिससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है और किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
हालांकि, विपक्ष का सवाल है कि जिस योजना से लाभ मिला, उससे जुड़े निर्णय लेने वाले बोर्ड में मंत्री की भूमिका होने के कारण क्या यह हितों के टकराव का मामला बनता है।
फिलहाल केंद्रीय मंत्री ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया है और वह एक किसान के रूप में इस योजना के पात्र थे।

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